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माँ

अधुरी सी यादे है, आधे से पल है| उन्हें मै समेटने की कोशिश कर रही हूँ| माँ मै तुम्हारी अक्श बनाने की कोशिश कर रही हूँ| याद आती है तुम्हारी हर एक बात, हर सुबह मुझे गाना गा के जगाना, मेरे खाने की चिंता करना, मेरे हाथों को अपने हाथों मे लेके, मुझसे अक्षर लिखवाना, … Continue reading माँ

सपनो को

मैंने अपने सपनो को मरते हुए देखा है टूटते हुए देखा है बिखरते हुए देखा है| मजबूरी की राहों से समझौता करते हुए देखा है समय के साथ लडते हुए देखा है अरमानों मे खा़क होते हुए देखा है तकदीर के साथ बिगडते हुए देखा है मैने अपनो को धोखेबाजी करते हुए देखा है मैंने … Continue reading सपनो को

जमशेदपुर

निडर सा बसा, दलमा के पहाड़ों से घिरा है।स्वर्ण-रेखा, खरकई और दोमुहानी की धरा है। स्वच्छ पर्यावरण, शांत और हरा है।लौह नगरी कहलाता ये मजबूती से अड़ा है।कहानी इसकी जितनी पुरानी है।कहे लोहा और स्टील की जुबानी है।जमशेद जी के सपनों का शहर है।कालीमाटी से जमशेदपुर और टाटानगर बनने का सफर है।छोटे से शहर में … Continue reading जमशेदपुर

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