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About estharnag01

I am a avid writer. I write poems and stories for my diary, but now I would like to share my passion and my content with my beloved readers. I am post graduate and my area of specialization is political science. But, I am fond of history. I love to read and write stories and poems. I love interacting with people. Everybody is special in his own life and maybe someone else life too. So now I am sharing my special stories and poems with my beloved writers. Its my humble request to my readers that after reading please share your views and comments on my stories and poems. This motivates me as a writer and encourages me to write more and better.

माँ

अधुरी सी यादे है,

आधे से पल है|

उन्हें मै समेटने की कोशिश कर रही हूँ|

माँ मै तुम्हारी अक्श बनाने की कोशिश कर रही हूँ|

याद आती है तुम्हारी हर एक बात,

हर सुबह मुझे गाना गा के जगाना,

मेरे खाने की चिंता करना,

मेरे हाथों को अपने हाथों मे लेके, मुझसे अक्षर लिखवाना,

मेरे साथ -साथ तुम खुद भी तो पढ़ती थी|

तुम कैसे मुझे डाॅंटती थी,

गुस्सा भी करती थी|

कभी -कभी तुम्हारी मार भी पड़ती थी|

तुम अपने सपनो को ,मुझे कहानी बना के सुनाती थी|

जो तुम कर ना पाई, वही मुझे बनाना चाहती थी|

माना हमारा साथ कम समय के लिए था|

पर तुम्हारी हर छोटी छोटी बात याद है मुझे,

और आज भी मै तुम्हे याद करती हूँ|

लेखिका-एस्थर नाग

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सपनो को

मैंने अपने सपनो को मरते हुए देखा है

टूटते हुए देखा है

बिखरते हुए देखा है|

मजबूरी की राहों से समझौता करते हुए देखा है

समय के साथ लडते हुए देखा है

अरमानों मे खा़क होते हुए देखा है

तकदीर के साथ बिगडते हुए देखा है

मैने अपनो को धोखेबाजी करते हुए देखा है

मैंने अपने सपनो को मरते हुए देखा है|

कोशिशों की लहरों में सपनो को डूबते हुए देखा है

हौशलो के पंखो को कटते हुए देखा है

हिम्मत को हारते हुए देखा है

मकसद को खोते हुए देखा है

रेत की तरह सपनो को हाथों से फिसलते हुए देखा है

मैंने अपने सपनो को मरते हुए देखा है|

Esther

जमशेदपुर

निडर सा बसा, दलमा के पहाड़ों से घिरा है।
स्वर्ण-रेखा, खरकई और दोमुहानी की धरा है।

स्वच्छ पर्यावरण, शांत और हरा है।
लौह नगरी कहलाता ये मजबूती से अड़ा है।
कहानी इसकी जितनी पुरानी है।
कहे लोहा और स्टील की जुबानी है।
जमशेद जी के सपनों का शहर है।
कालीमाटी से जमशेदपुर और टाटानगर बनने का सफर है।
छोटे से शहर में धड़कता जुबली पार्क है।
डिमना, हुडको, P M मॉल और मोदी पार्क है।
यहां की हर बात ख़ास है।
साकची के गोलगप्पे, लिट्टी,आशीर्वाद का डोसा और पप्पू का चाट है।
खेल का मैदान हो या सिने जगत की बात हो,
माधवन, प्रियंका, तनुश्री, इम्तियाज़, वरुण, सौरभ की कैसी न बात हो।
XLRI , NIT भी अपनी अलग पहचान बनाती है।
साकची बिस्टुपुर तो यहां की शान बढ़ाती है।

हर साल जब भी 3rd मार्च आता है,
जुबली पार्क एकदम से जगमगा जाता है।
लोहे का शहर हो के भी, यहां लोहे सा दिल नहीं।
दूर हो के भी कोई इसे भूल जाये, ये मुमकिन नहीं।

Esther nag