जमशेदपुर

निडर सा बसा, दलमा के पहाड़ों से घिरा है।
स्वर्ण-रेखा, खरकई और दोमुहानी की धरा है।

स्वच्छ पर्यावरण, शांत और हरा है।
लौह नगरी कहलाता ये मजबूती से अड़ा है।
कहानी इसकी जितनी पुरानी है।
कहे लोहा और स्टील की जुबानी है।
जमशेद जी के सपनों का शहर है।
कालीमाटी से जमशेदपुर और टाटानगर बनने का सफर है।
छोटे से शहर में धड़कता जुबली पार्क है।
डिमना, हुडको, P M मॉल और मोदी पार्क है।
यहां की हर बात ख़ास है।
साकची के गोलगप्पे, लिट्टी,आशीर्वाद का डोसा और पप्पू का चाट है।
खेल का मैदान हो या सिने जगत की बात हो,
माधवन, प्रियंका, तनुश्री, इम्तियाज़, वरुण, सौरभ की कैसी न बात हो।
XLRI , NIT भी अपनी अलग पहचान बनाती है।
साकची बिस्टुपुर तो यहां की शान बढ़ाती है।

हर साल जब भी 3rd मार्च आता है,
जुबली पार्क एकदम से जगमगा जाता है।
लोहे का शहर हो के भी, यहां लोहे सा दिल नहीं।
दूर हो के भी कोई इसे भूल जाये, ये मुमकिन नहीं।

Esther nag

1 thought on “जमशेदपुर

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