अंतर क्यूँ ?

भूमिका :समाज की सोच जो लड़कियों के प्रति है, उसको बदलने की जरूरत है। क्यूँ हर परिस्थिति के लिए लड़की ही जिम्मेदार होती है?

आजादी क्या? लड़के।

पाबंदी क्या? लड़की।

बढ़ती तादाद क्या? लड़के।

घटती आबादी क्या? लड़की।

फर्क है इतना गर इनमें,

एकता लाओगे कहाँ से मन में?

जरुरी है इनको अब सीखना और सीखाना।

क्योंकि मेरे ख्याल से ये एक दूसरे के लिए ही है जन्में।

जन्म लड़कियों का हमारे देश में अभिशाप समझा जाता है।

लड़को का जन्म किसी भी क्लेश में आशिर्वाद समझा जाता है।

मूर्खता की हद इतनी काफ़ी नहीं लोगों में की,

कल की जन्मी नन्हीं बच्ची का भी,

प्राण छीन लिया जाता है।

जरूरी है अब इनको सीखना और सिखाना।

क्योंकि मेरे ख्याल से “जन्म” शब्द भी इन्हीं,

लड़कियों से है जन्मे।

संस्कार की बात क्यों सिर्फ,

बेटियों को ही बताया जाता है?

क्यों नहीं हर बेटे को घरों में,

नैतिक जिम्मेदार बनाया जाता है।

आप बस पहल तो करो।

अपने घर की ओर देखो।

हर बेटी सुरक्षित लौटेगी अपने घर कल को।

जरूरी है इनको अब सीखना और सिखाना।

क्योंकि मेरे ख्याल से,

इनसे हम हैं और हमसे कल हमारा।।।

Writer – (Beaula Boipai)

Photo by hitesh choudhary on Pexels.com

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4 thoughts on “अंतर क्यूँ ?

  1. Khubsurat soch ke sath badhte jao har lamhah khubsurat ban jayega
    Ap isi tarah likhte jao
    Ek din apko award jarur mil jayega.

    Like

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